चैधरी चाय

नितिन चैहान |

वैसे तो चाय हम बहुत पीते हैं। मैं भी घर की चाय ख़ूब पीता हूं, लेकिन एक बार मेरे दोस्तों ने बाहर की चाय पिलाई। दोस्तो का कहना था कि उस दुकान पर चाय पीने के लिए हौजरानी, सावित्री नगर, चिराग़ दिल्ली, यहाँ तक कि मदनगीर जैसी दूरदराज की जगहों से भी लोग आते हैं। यह दुकान मेरे घर के पीछे वाली गली में है. यह दुकान सुबह 5 या 6 बजे खुल जाती है। और अचरज की बात है कि लोगबाग भी वहां इतनी जल्दी जुटने लगते हैं।
दुकान पर चाय के साथ मट्ठी, बिस्कुट, नमकीन और फैन के अलावा सिगरेट और कोक वगैरह भी मिलते हैं। यह दुकान रात 12 बजे बंद होती है। और रात के 2:30 बजे फिर खुल जाती हैं। गजब ये है कि वहां रात के 2:30 बजे सुबह से ज़्यादा भीड़ होती है। दुकान में चाय का मूल्य तो सुबह-शाम वही रहता है, लेकिन रात के समय कोक, फ्रूटी और पानी की बोतल महंगी हो जाती है। मतलब सुबह 40 रुपये में मिलने वाली कोक रात को 55 रुपये की हो जाती हैं। पूरे इलाक़े में एक यही दुकान है जो इतनी देर रात तक खुलती है। यह दुकान तब से चल रही है, जब मैं पैदा भी नहीं हुआ था।
इस दुकान पर चाय पीने के लिए रात को पुलिस वाले बहुत आते हैं। जिन पुलिस वालों की ड्यूटी रात को रहती है, वे भी अपनी नींद भगाने के लिए यहीं से चाय मँगवाते है। पुलिस वालों ने मुझे और मेरे दोस्तों को भी यहाँ चाय पीते देखा है। इस दुकान के कारण हमें बहुत फ़ायदा हुआ है। कभी जब हम सब दोस्त रात को बाहर घूमने जाते हैं और हमें पुलिस वाले पकड़ लेते हैं तो हम बोल देते हैं कि हम चैधरी चाय वाले की दुकान पर जा रहे हैं। यह सुनकर पुलिस वाले हमें छोड़ देते हैं. लेकिन कई बार पुलिस वाले हम से ही चाय लाने के लिए बोल देते हैं। ऐसे में, हमें उनके लिए चाय ले जानी पड़ती है।
इस दुकान पर वही लोग आते हैं जिनकी नाईट ड्यूटी होती है। उनमें ज़्यादातर लड़के-लड़कियां होती है। वे शायद मदनगीर से आते हैं और अक्सर कार में होते हैं। जब वे लोग यहां हैं तो पुलिस वाले उनसे कुछ नही बोलते।
हम इस दुकान पर आने वाले बस दो पुलिस वाले को जानते हैं। उन्होंने मुझे और मेरे दोस्त को कई बार मालवीय नगर मार्केट में बाइक पर पकड़ा है। तब हम बोल देते थे कि हम चैधरी चाय वाले दुकान पर जा रहे हैं। पर एक बार ये पुलिस वाले हमारे पीछे पड़ गए थे। उन दिनों मेरे एक दोस्त ने नई बाइक ली थी। उसने बाइक का साइलेंसर बदल रखा था। हम इस साइलेंसर को ‘छोटा सरदार’ कहते थे। वह बहुत तेज़ से आवाज़ करता था। पुलिस वालों ने हमें रोकना चाहा, लेकिन हम बग़ैर रुके वहां से भाग गए। हमें लगा था कि हम बच गए हैं, लेकिन दोनों पुलिस वालों ने हमारी बाइक को अच्छी तरह पहचान लिया था। जब मेरे दोस्त की बाइक चाय वाले के पास खड़ी थी तो एक सिपाही ने बाइक की नंबर प्लेट का फोटो खींच लिया। उन्होंने नंबर प्लेट का फोटो शायद इसलिए खींचा था क्योंकि उस पर ‘ख़ानदानी नवाब’ लिखा था।
हम सब दोस्तो ने उन दोनों पुलिस वालों को एक-एक नाम भी दे रखा था। हमने एक का नाम सिंघम और दूसरे का नाम अजय देवगन रखा हुआ था क्योंकि उनका काम उनके नाम पर ख़ूब जंचता था। हमने उसका नाम सिंघम इसलिए रखा क्योंकि वो पुलिस वाला ग़लत काम करने वालों के साथ सख़्­­ती से पेश आता है। उसका नाम पूरे मालवीय नगर, खिड़की गांव, खिड़की एक्सटेंशन और हौजरानी में जाना जाता है। हमने दूसरे पुलिस वाले का नाम अजय देवगन इसलिए रखा क्यूंकि उसका चेहरा फिल्म स्टार अजय देवगन से मिलता है। जब भी पुलिस वाले अपनी ड्यूटी ख़त्म करके आते है तो वे इस दुकान पर चाय ज़रूर पीते हैं। जब वे चाय पी रहे होते हैं तो कोई नहीं बता सकता कि उनमें वन-स्टार, टू-स्टार या थ्री-स्टार इंस्पेक्टर कौन सा है। उस समय सब पुलिस वाले एक जैसे लगते हैं।
इसलिए हम यह बात बोल सकते हैं कि यह एक ऐसी दुकान है जो सब को एक ही नजरों से देखती हैं- चाहे वह पुलिस वाला हो, फैमिली वाला हो, नौकरी वाला हो, अमीर हो या गरीब हो। यहां सब एक जैसे दिखते हैं।
कभी- कभी चाय की दुकानों पर कुर्सी या किसी और चीज़ के लिए लड़ाई हो जाती है, पर यहां कभी ऐसा नही होता। यहां लोगबाग थोड़ा इंतज़ार कर लेते है। लोग सोचते हैं कि जब कोई उठेगा तो हम तब बैठ जाएंगे। मतलब, यहां की चाय लोगों को इतनी पसंद है कि उन्हें कहीं और की चाय अच्छी नहीं लगती। लोग सोचते हैं कि अगर उनको पूरे दिन में यहां की चाय नहीं मिली तो जैसे उनकी सुबह ही नही हुई!
यहां पर लोग गाली भी नही देते क्योंकि दुकानदार ने अपनी दुकान पर एक इबारत लिखवा रखी है। यहाँ कोई उधार भी नही माँगता है क्योंकि दुकान पर उधार मांगने वालों के लिए भी एक बात लिखी है। इस इबारत में लिखा है रू उधार उसी को मिलेगा जिसके मम्मी पापा 80 साल के हों और उनके मम्मी पापा भी 80 साल के हों! साफ़ है कि वहां किसी को उधार नहीं मिल सकता क्योंकि उधार मांगने वाले लोगों के मम्मी-पापा और ख़ुद उनके मम्मी-पापा की उम्र 80 साल की नहीं हो सकती। इस तरह, चाय की इस दुकान पर कोई उधार नहीं मांग सकता!


Chaudhari Chai

Nitin Chauhan |

Most of us have a habit of drinking a lot of tea. I do too, but mostly I drank tea made at home. On one occasion my friends treated me to tea made somewhere outside, from a particular stall. They told me that people come from near and far – from Hauz Rani, Savitri Nagar, Chirag Dilli, even from Madan Gir – to drink tea made at Chaudhari Chai, which is in the lane behind my house in Khirkee. Everyone gathers at this tea-stall because most people like the tea made there very much. The stall opens between 5 and 6 am so that it can attract early customers, and quite a few people do come there at that hour.

At Chaudhari Chai, along with tea you also can get cigarettes and Coke, and snacks to have with the tea, such as matthi, biscuits, namkeen, fan etc. The stall is open from between 5 and 6 am till midnight, and then it reopens at 2 am, and there are even more customers at that time than in the morning, they wait in the lane for the stall to open again. At this hour the price of tea is the same, but Coke, Frooti, bottled water etc. are sold at higher rates – for example, Coke that costs Rs 40 in the morning now costs Rs 55. This is the only tea-stall that is open in the night, and it does very good business. It has been running even before I was born.

A lot of policemen come to the stall at night to drink tea, and the police on night patrol in the locality send for tea from this stall, they drink a lot of tea in order to stay awake. Quite a few times they have noticed me and my friends hanging out drinking tea there. This is actually an advantage for us, because when they catch us roaming around at night and question us, we always tell them that we are going to Chaudhari Chai, even if we are going elsewhere. When they hear this they mostly let us go, but sometimes they order us to bring them tea from the stall and we have no choice except to obey them. The customers at that hour usually are night-shift workers from somewhere in Madangir, both men and women, they drive up in cars. When those kind of tea-drinkers are present, the police don’t interfere.

We see many policemen regularly at the stall but I am familiar with only two of them, from an incident. One night my friends and I were on our motorbikes going through Malviya Nagar market. One of my friends had a new bike with a customized silencer he called Chhota Sardar ‘(‘Junior Chief’) because it made the bike so noisy. That noise drew the attention of the police. This time when they stopped us we didn’t give the usual excuse that we were going to Chaudhari Chai. Instead, we all rode off, while one policeman managed to take a photo on his phone of my friend’s rear number plate on which was written Khandani Nawab (‘Lord of the Family’). After that we hoped that they would not recognize us as night customers at the tea-stall or recognize the bike when it was parked outside Chaudhari Chai, because just like them we hang out there a lot.

We friends have given each of those two policemen a nickname in accordance with their behaviour. One is called ‘Singham’ and the other is called ‘Ajay Devgan’. We chose ‘Singham’ because (like the hero in the movie Singham) he takes very tough action against law-breakers. He is known for this through the whole of Malviya Nagar, Khirki Village, Khirki Extension and Hauz Rani. We chose ‘Ajay Devgan’ for the other policeman because he looks like the film star Ajay Devgan. When their shift is over these two and other policemen – regardless of having one star, two stars, three stars or no stars on their uniforms – always come to drink tea at Chaudhari Chai. At that time there is no sense of superiority or seniority. That is why we say that this tea-stall is the one place in the locality that sees everyone as equal, whether the customer is a policeman, family man or working person – the rich and poor are treated alike.

At Chaudhari Chai, there is no swearing, abusing or foul language by customers because the stall owner has a verse written to remind us to maintain good conduct. And no one asks for goods on credit either, because there is another statement for that too – it declares that only those whose parents are 80 years old and grandparents are also 80 years old, will be given any goods on credit. In other words, an impossibility!

Sometimes people get into altercations or arguments at tea-stalls, over chairs, seating space and other things. But not at Chaudhari Chai. Rather, like most customers, my friends and I wait patiently for people to finish their tea and get up to leave before we move in to take their seats. Those who drink tea here and are used to it are unable to enjoy the taste of tea at any other stall. Many people are so habituated that they can’t start their morning without it. And if they can’t have at least one tea from here daily, they feel dissatisfied. There is truly something special about the tea here

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