Vidhi |

One of my friends Shikha used to take tuition somewhere in Malviya Nagar, South of Delhi. Shikha liked studying there, and she was very friendly with her teacher.
While being a student of class 9th, she started taking tuition there. Shikha liked the way her teacher taught, so she went back to the same place for the next year also.
Due to frequent visits with her family out of town, she could hardly attend classes. However, when her 1st term was near, she said to her teacher that “she needs extra classes”.
Her teacher said ‘Okay you could come for extra classes at my place.’ She didn’t feel uncomfortable or embarrassed, as she had already visited her teacher’s place for studying.
Her teacher gave her time for extra classes at 11 am. On the next morning she woke up and got ready for her class. She asked her father to drop her at the teacher’s place, in Shivalik apartment, which is not very far from her house. After the usual greetings, she was asked to open her books. Her teacher gave her the notes and explained to her quite well, which cleared all her doubts. As soon as the class finished, she called up her dad to pick her up.
On the second day, she went back for further lessons. While the class was going on, her teacher asked “why don’t you wear shorts now?” she replied that it’s winter, and she doesn’t like wearing shorts during this time of the year.
After the class was over, she was asked to come for her lesson on the next day at 1:45 pm.
The next day, she entered the tuition class and sat on the chair. Her teacher came and sat next to her and closed the door. They were learning the chapter on reproduction. Suddenly, he held her hand and started playing with her fingers. It was extremely uncomfortable for her, she literally got scared by that. Not knowing how exactly she should respond, she pulled her hand back and tried to divert her mind. Meanwhile, staring at Shikha, her teacher continued with the lesson. Suddenly he crossed his limit of behaving appropriately.
It was quite a shock for Shikha to deal with the situation. She ran out of the room. She called her dad and asked him to pick her up. Unfortunately, because of the busy schedule of the work, her dad couldn’t pick her up that day. She went home on her own.
Shikha was scared about the incident that she just experienced. She did not know how to pin it down. She felt low and also became apprehensive about whom to share with the unusual episode.
A lot of thoughts occupied her head. She felt utterly helpless and poured her heart out. She thought that nobody would understand her and they will make fun of her. It was hard for Shikha to realise the seriousness of the matter. She texted one of her friends Vineet and told him everything. He told her to calm down and assured her that he understood the situation. Vineet insisted Shikha to inform her parents about this matter. But afraid of being misunderstood by her parents, she felt lost. Her friend, Vineet, told her that if she cannot confront her parents then he will inform them. So she decided to tell her mom. She narrated everything to her mother.
Her mother hugged Shikha and told her that there is nothing to be worried about or to be afraid of. Her mother decided to accompany Shikha to the tuition place. She was so affected by the incident that Shikha felt that it wouldn’t be safe for her mother as well. Her mom asked her to relax and promised that she would sort this out.
Next day her mother went to her daughter’s tuition center and asked them who takes the science tuition? The teacher came out and introduced himself to her.
Her mom asked, if they could talk. So in the evening the teacher went to Shikha’s house. Her mother asked straight away to the teacher, what he did to her daughter. The teacher, without replying to her mother’s question, requested if he could meet Shikha and talk to her. The mother was very reluctant about the fact that he would meet her daughter.
The girl heard that from inside and became afraid of seeing him. Her mother confronted him, and asked him how he could be so shameless She was astonished that instead of being embarrassed, he was seeking permission to meet Shikha.
Unabashed the teacher asked her mother, if she would accept money and forget the episode, which happened with her daughter. Shikha’s mother got furious when she found out that the teacher was trying to bribe her. Shikha’s mother insisted him to apologize to her daughter. She called her daughter from inside. The teacher with extreme disgrace, knelt down and asked Shikha to forgive her. She could not understand the need of this further embarrassment. Humiliated, she ran inside the room and burst into tears. She stopped going to that tuition centre. Of course, it took a long time to recover from this traumatic incident.
Now Shikha has found a new tuition center in Gupta colony, much closer to her home. But the fear has not wiped out of her mind. She is no longer the same confident person that she used to be. She goes to her new tuition everyday and whenever the teacher tries to come close to her, to explain something about the lesson, she stands up and trembles. She has stopped talking to any other pupil in the class. She sits in the corner and waits for the class to be over.


विधि |

मेरी एक सहेली शिखा मालवीय नगर में किसी ट्यूशन सेंटर में पढ़ती थी। उसे अपने ट्यूटर से पढ़ना अच्छा लगता था और उसकी उससे काफी अच्छी बातचीत भी हो गई थी।
क्लास 9 में पढ़ने की वजह से वह ट्यूशन पढ़ा करती थी। उसे ट्यूटर के पढ़ाने का तरीका बहुत अच्छा लगता था। इसीलिए अगले साल भी वह वहीं पढ़ने गई।
अक्सर शहर से बाहर जाने की वजह से शिखा की क्लासें नियमित नहीं हो पा रही थीं। पर फर्स्ट टर्म नजदीक होने के कारण उसने ट्यूटर से कहा कि ‘वह एक्स्ट्रा क्लास लेना चाहती है।‘
उसका ट्यूटर राजी हो गया। उसने कहा- तुम मेरे घर एक्सट्रा क्लास के लिए आ सकती हो। उसे कुछ भी असहज नहीं लगा, न ही उसे किसी तरह की परेशानी महसूस हुई। वह पहले भी पढ़ने के लिए ट्यूटर के घर जा चुकी थी।
शिखा के ट्यूटर ने उसे सुबह 11 बजे का समय दिया। अगले दिन सुबह उठकर वह ट्यूशन जाने के लिए तैयार हो गई। उसने अपने पापा से कहा कि वह उसे ट्यूटर के घर छोड़ दें। वह शिवालिक अपार्टमेंट में रहता था। शिखा के घर से वह अपार्टमेंट बहुत दूर नहीं था। ट्यूटर के घर पहुंचने पर शिखा ने किताबें खोल लीं। ट्यूटर ने उसे नोट्स दिए और अच्छी तरह समझाने लगा। उसके सवालों के जवाब देता गया। जैसे ही क्लास खत्म हुई, शिखा ने पापा को फोन लगाया कि उसे आकर ले जाएं।
दूसरे दिन फिर वही सब हुआ। शिखा पढ़ ही रही थी कि ट्यूटर ने उससे पूछा- ‘तुम अब शॉर्ट्स क्यों नहीं पहनतीं?’ उसने जवाब दिया, ‘सर्दियों के दिन हैं इसलिए इस समय शॉर्ट्स नहीं पहन सकती।’
क्लास खत्म होने के बाद ट्यूटर ने कहा कि अगले दिन वह क्लास के लिए पौने दो बजे आए।
तीसरे दिन शिखा ट्यूटर के घर पहुंची और कुर्सी पर बैठ गई। ट्यूटर ने दरवाजा बंद कर दिया और उसके पास आकर बैठ गया। वे लोग रीप्रोडक्शन का चैप्टर पढ़ रहे थे। एकाएक ट्यूटर ने शिखा का हाथ पकड़ लिया और उसकी उंगलियों से खेलने लगा। शिखा के लिए बहुत अजीब सा था। वह बहुत ज्यादा डर गई। पहले तो उसे समझ नहीं आया कि वह क्या करे, फिर उसने अपना हाथ खींचा और अपना ध्यान किताब की तरफ लगाने की कोशिश की। ट्यूटर शिखा को घूरे और पढ़ाए जा रहा था। एकाएक उसने हद पार की दी और अनुचित तरीके से बर्ताव करने लगा।
शिखा दहल गई। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह इस हालत में क्या करे। वह कमरे से बाहर निकल गई। पापा को फोन किया और उन्हें आने को कहा। पापा अपने काम में बहुत बिजी थे इसीलिए उस दिन शिखा को लेने नहीं आ पाए। वह अकेले ही घर चल दी।
इस घटना ने शिखा को बहुत डरा दिया। वह समझ नहीं पा रही थी कि इसे कैसे भूले। वह बहुत बुरा महसूस कर रही थी और चाहती थी कि इसके बारे में किसी को बताए। पर किसे, यह समझ नहीं आ रहा था।
शिखा के दिमाग में हजारों विचार उमढ़ रहे थे। बेबसी में वह अपने दिल की बात किसी को बताना चाहती थी। पर उसे लगता था कि उसकी बात कोई नहीं समझेगा। सभी उसका मजाक उड़ाएंगे। यह मामला कितना गंभीर है, शिखा को अंदाजा नहीं था। अचानक उसे विनीत का ख्याल आया। विनीत उसका अच्छा दोस्त था। उसने विनीत को मैसेज किया और सारी बात बता दी। विनीत ने उसे सांत्वना दी और भरोसा दिलाया कि वह उसकी स्थिति समझता है। उसने शिखा से कहा कि उसे अपने माता-पिता को सारी बातें बतानी चाहिए। लेकिन शिखा को लग रहा था कि वह उसे गलत समझेंगे। वह दुख से भर गई थी। विनीत ने उससे कहा कि अगर वह अपने माता-पिता को सारी बात नहीं बता सकती, तो वह खुद उन्हें सब कुछ बताएगा। इसके बाद शिखा ने हिम्मत करके अपनी मां को सब कुछ बता दिया।
मां ने शिखा को गले से लगा लिया। वह बोलीं कि डरने की कोई बात नहीं है और न ही चिंता करने की बात है। उन्होंने शिखा के साथ ट्यूटर सेंटर जाने का फैसला किया। पर शिखा इसके लिए तैयार नहीं थी। उसे लग रहा था कि ट्यूटर के मिलना, उसके और उसकी मां, दोनों के लिए सुरक्षित नहीं है। मां ने उसे शांत रहने को कहा और कहा कि वह सारे मामले से निपट सकती हैं।
अगले दिन शिखा को साथ लेकर मां ट्यूशन सेंटर पहुंची और वहां पूछा कि साइंस की ट्यूशन कौन लेता है। ट्यूटर आया तो मां ने उसे अपना परिचय दिया।
मां ने पूछा कि क्या हम लोग बात कर सकते हैं? उसी दिन शाम को ट्यूटर शिखा के घर आया। मां ने उससे साफ-साफ पूछा, ‘आपने मेरी बेटी के साथ क्या किया।’ ट्यूटर ने उनके सवाल का जवाब देने की बजाय उनसे पूछा कि क्या वह शिखा से मिल सकता है और उससे बात कर सकता है? मां इस बात के खिलाफ थीं कि ट्यूटर को शिखा से मिलने दिया जाए।
शिखा अंदर के कमरे से उनकी बातचीत सुन रही थी। वह ट्यूटर का सामना करने से भी डर रही थीं। मां ने ट्यूटर से कहा, ‘आप इतने बेशर्म कैसे हो सकते हैं… इतना सब करने के बाद भी मेरी बेटी से मिलना चाहते हैं।’ वह इस बात से काफी हैरान थीं कि शर्मिन्दा होने के बजाय ट्यूटर शिखा से मिलना चाहता है।
इससे भी हैरान करने वाली एक बात और हुई। ट्यूटर ने शिखा की मां से कहा कि क्या वह कुछ पैसे लेकर मामले को रफा-दफा कर सकती हैं। शिखा की मां गुस्से से तमतमा गईं। ट्यूटर पैसों से उनका मुंह बंद करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने शिखा को आवाज दी। ट्यूटर लज्जित होकर घुटने के बल बैठ गया और शिखा से उसे माफ करने को कहने लगा। शिखा को समझ नहीं आया कि इस तरह उसे शर्मिन्दा करने की क्या जरूरत है। वह अपमान से भरी अपने कमरे की तरफ भागी और फूट-फूटकर रोने लगी। ट्यूशन सेंटर जाना तो उसने छोड़ ही दिया। और इस हादसे से निकलने में उसे काफी समय लगा।
अब शिखा गुप्ता कालोनी के एक ट्यूशन सेंटर में पढ़ने जाती है। यह सेंटर उसके घर से काफी पास है। पर उसके दिल से डर अभी पूरी तरह निकला नहीं है। अब वह पहले जैसी आत्मविश्वासी लड़की नहीं है। वह ट्यूशन पढ़ने रोज जाती है पर जब भी कोई ट्यूटर उसके सवालों के जवाब देते हुए उसके पास आता है, वह खड़ी हो जाती है और कांपने लगती है। उसने अपने सहपाठियों से बात करनी बंद कर दी। वह कोने में बैठी रहती है और क्लास खत्म होने का इंतजार करती है।

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