Momo Recipe!

In conversation with a Momo maker in Khirkee

80% minced chicken,
20% minced soyabean meat,
Two spoon garlic and ginger paste,
Two chopped onion,
Chopped corriander leaves,
Half tea spoon ajina moto,
Flour dough is made with warm water and kneaded well to make a soft dough.

Momo Recipe!

Smiled the short Nepali lady from Darjeeling, wearing an apron over a full sleeve Tshirt and a black pant and asking her sister to wash the utensils. She expressed very firmly that ‘I prepare different momos from the others who sell in Khirki, Malviya Nagar area!’

She was staying in Noida for many years, working with her brother at a cafe of his own.

She has recently moved to Khirki extension. She expressed very optimistically that in order to make her own career in Nepali food, away from her brother’s food joint which is in Noida, she has opened the joint in this Urban Village.

In terms of rent, Khirki is much cheaper and people here are fond of Nepali and Chinese cuisine. She tells that momo making is a craft and not everybody is an expert at that. Her way of making is much different from others and specially the chutney she makes, is addictive. She proudly bragged that her ingredients in chutney comprise chilies, lemon and ginger with a paste of cabbage leaves, which nobody uses. She makes the chutney of a unique taste. So, people from the neighbourhood come flocking to her shop.

Apart from Momo, she makes noodles and chilly potato, but her Momos are the most popular. She says that there is a big competition in the market here as there are many momo joints in the locality. But she thinks that her Momos attract the young people and mainly the children.

She was very fond of making food since she was 12. She loves making food and feeding others. This is her passion. However, she guesses that the way of the taste of Momos has become much different from the authentic way of making it which she had seen, during her childhood days in Darjeeling and this is to cater to people from different cultural backgrounds. That’s why she says that when she first used only minced chicken in her Momos, she was not accepted in the locality of Khirki. Some elderly people have advised her to use a bit of minced soya bean in the ingredients. So, she has started using 80% of chicken and 20% minced soya bean. The taste is accepted and there is a high demand for it.

Her joint remains alive from the evening to late night. There are customers coming in who prefer to sit and eat inside the small shop and some people order take away. Lots of youngsters love delivery at home on phone. She thinks that Momos are the most wanted food from her shop.

Further, she is also interested in North Indian food. In her free time, she goes to internet and learns how to make food from other parts of India. She has learnt to make curry chawal (curry & rice) rajma chawal (red kidney bean curry and rice) but does not know how to include them in her shop’s food menu.


मोमोज़ की रेसिपी

अनु लामा से बातचीत

80% चिकन कीमा,
20% सोयाबीन कीमा,
दो चम्मच अदरक-लहसुन का पेस्ट,
दो प्याज, बारीक कतरे,
धनिया की पत्ती, बारीक कटी,
आधा चम्मच अजीनोमोटो
गर्म पानी से नरम गूंथा मैदा

मोमोज़ की रेसिपी !

यह कहकर छोटे से कद वाली वह नेपाली महिला मुस्कुराई। दार्जिलिंग की रहने वाली उस महिला ने पूरी बाजू वाली टीशर्ट के साथ काले रंग का ट्राउजर पहना हुआ था और उसके ऊपर लंबा सा एप्रेन लटक रहा था। अपनी बहन को बर्तन धोने की हिदायत देकर वह हंसकर बोली, ‘खिड़की, मालवीय नगर के इलाके में जिस तरह के मोमोज़ बिकते हैं, मै उनसे अलग मोमोज़ बनाती हूं।‘
इससे कई साल पहले वह अपने भाई के साथ नोएडा में एक कैफे चलाती थी। तब वह नोएडा में रहती थी।
खिड़की एक्सटेंशन में अभी वह कुछ ही दिन पहले आई है। वह उम्मीद से भरकर कहती है कि नोएडा स्थित अपने भाई के फूड ज्वाइंट से अलग नेपाली फूड में अपना करियर बनाने के लिए उसने इस अर्बन विलेज में यह ज्वाइंट खोला है।
जहां तक किराए का सवाल है, तो खिड़की काफी सस्ता है और यहां के लोग नेपाली और चाइनीज व्यंजनों के शौकीन हैं। वह कहती है कि मोमो बनाना एक कला है और इसे बनाने वाले सभी लोग पारंगत नहीं होते। वह दूसरों से अलग तरीके के मोमोज़ बनाती है, खासकर उसकी बनाई हुई चटनी बहुत स्वादिष्ट होती है। जो एक बार खाएगा, दीवाना हो जाएगा। वह गर्व से भरकर कहती है कि उसकी चटनी में मिर्च, नींबू और अदरक होता है, साथ ही पत्तागोभी को पीसकर वह उसमें मिलाती है। कोई दूसरा ऐसा नहीं करता। उसकी चटनी का स्वाद अनोखा होता है। इसलिए आस-पास के लोग उसकी दुकान पर खूब आते हैं।
मोमोज़ के अलावा वह नूडल्स और चिली पोटैटो भी बनाती है लेकिन उसकी दुकान के मोमोज़ सबसे लोकप्रिय हैं। वह कहती है कि इस इलाके में बहुत से मोमो ज्वाइंट्स हैं इसलिए यहां बहुत प्रतिस्पर्धा है। लेकिन उसे लगता है कि युवाओ और विशेष रूप से बच्चों को उसके मोमोज़ बहुत पसंद आते हैं।
खाना बनाने का शौक उसे 12 साल की उम्र से है। उसे खाना पकाना और दूसरों को खिलाना बहुत अच्छा लगता है। यह उसका पैशन है। उसे लगता है कि उसके मोमोज़ का स्वाद सबसे अलग इसलिए है क्योंकि वह उसे ठीक उसी तरह से बनाती है जैसा उसने अपने बचपन में दार्जिलिंग में देखा था। अलग-अलग सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों वाले लोगों को ऐसी चीजें पसंद आती हैं। जब उसने खिड़की में मोमोज़ बनाते समय उसमें सिर्फ चिकन कीमा भरा तो लोगों ने उसे सलाह दी कि उसके साथ थोड़ा बारीक सोयाबीन भी मिला दे। अब वह 80% चिकन के साथ 20% बारीक सोयाबीन मोमोज़ में भरती है। इस स्वाद को लोग पसंद करते हैं और उसकी खूब मांग है।
शाम से देर रात तक उसके ज्वाइंट पर भीड़ लगी रहती है। कुछ ग्राहक वहीं बैठकर खाना पसंद करते हैं तो कुछ अपने साथ पैक कराके ले जाते हैं। बहुत से युवा लोग फोन से डिलिवरी के ऑर्डर भी देते हैं। उसे लगता है कि उसकी दुकान के मोमोज़ सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं।
इसके अलावा वह उत्तर भारतीय खाना पकाना भी सीखना चाहती है। इसके लिए वह इंटरनेट खंगालती है और यह जानने की कोशिश करती है कि भारत के दूसरे हिस्सों में कैसा खाना खाया जाता है। उसने कढ़ी चावल, राजमा चावल बनाना सीखा है लेकिन यह नहीं सोच पा रही है कि उसे अपने फूड मेन्यू में कैसे शामिल करे।

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