Balloon

I want to share a memory from my days in Kabul, Afghanistan.

The first time, I have heard a bomb blast, when I was only 6 years old. I thought maybe someone has popped the largest balloon. I was so willing to know how big the balloon was?

But then I saw my mother with a frightened face. My mother turned on the TV and we watched breaking news, I saw people who were badly bleeding, children crying because they were terrified. We watched people panicking and running helplessly in search of their friends, family members, children, relatives. A lot of houses was destroyed, people were left as homeless.

However, I never had imagined that a blasting of a balloon could harm somebody like this.

On that day I was alone with my mom and my brother, father and my other siblings were outside.

Another bomb blast happened and that was near to my sisters’ school. So my mother was very scared. Within a second my mother quickly took her hijab and went to pick up my sisters.

When she came back she didn’t just only bring my sisters, but also she brought those who were stuck in school as the policeman didn’t allow them to go alone out of the school premise without any escort. My mother decided to help them.

My mother brought them to our home and called their family members to pick up them from our home.

I cannot forget the happiness and joy that could be seen in their eyes and their family members.

If I put myself in their position stuck in a horrible situation and everyone seek to rescue their lives even thinking about such a situation scares me.

But still, there are good people who care about others also.

I am proud that my mother is also one of such people.

Now when I am grown up, I understand that it wasn’t an ordinary balloon with helium gas or any natural gas which is made for the purpose of bringing joy, happiness and smile to everyone, instead it was a balloon full of gases of heartlessness, inhumanity, insensitiveness, cruelness and all the bad gases that had made for the purpose of bringing sorrow, disaster, it brings tear to my eyes.


गुब्बारा

हादिया |

मैं अपनी उन यादों को साझा करना चाहती हूं जब मैंने बम विस्फोट के बारे में सुना था। तब मैं 6 साल की थी। इस हादसे के बारे में सुना तो मुझे लगा, जैसे कोई बड़ा सा गुब्बारा फूटा है। मैं यह जानने के लिए बेताब थी कि वह गुब्बारा कितना बड़ा था।
लेकिन तभी मैंने देखा कि मेरी अम्मी बहुत डरी हुई हैं। उन्होंने टीवी ऑन किया। टीवी पर बम विस्फोट की खबरें आ रही थीं। लोग खून से लथपथ थे। बच्चे रो रहे थे क्योंकि उनके घर तबाह हो गए थे। लोग बदहवास से अपने दोस्तों, परिवार के सदस्यों, बच्चों और रिश्तेदारों को तलाश रहे थे।
मैं यह सोच भी नहीं सकती थी कि कोई गुब्बारा इतना बड़ा नुकसान कर सकता है।
मैं घर पर अपनी अम्मी के साथ अकेली थी। मेरे भाई, बहन और अब्बा घर पर नहीं थे।
बम विस्फोट मेरी बहनों के स्कूल के पास हुआ था। मेरी अम्मी डर से कांप रही थईं। उन्होंने जल्दी-जल्दी अपना हिजाब पहना और मेरी बहनों को स्कूल से लेने के लिए निकल पड़ीं।
जब अम्मी घर लौटीं तो उनके साथ सिर्फ मेरी बहनें ही नहीं, दूसरे कई बच्चे थे। वे सभी को स्कूल से अपने घर ले आई थीं क्योंकि पुलिसवाले बच्चों को स्कूल से अकेले घर जाने नहीं दे रहे थे। मेरी अम्मी ने उनकी मदद करने का फैसला किया था।
इसके बाद अम्मी ने उन सभी बच्चों के परिवारवालों को फोन किया कि बच्चे सुरक्षित हैं और हमारे घर पर हैं। वे उन्हें हमारे घर से ले जा सकते हैं।
मुझे आज भी याद है कि उन बच्चों और उनके परिवारवालों की आंखें खुशियों से चमक रही थीं। बच्चे सुरक्षित जो थे।
मैं कल्पना करती हूं कि अगर मैं भी ऐसे डरावने हालात में फंसी होती और सभी अपनी-अपनी जिंदगी बचाने में लगे होते तो कैसा होता। यह सोचकर भी मैं सिहर जाती हूं।
लेकिन अब भी ऐसे अच्छे लोग हैं जो दूसरों की मदद करते हैं और दूसरों के बारे में सोचते हैं।
मुझे फक्र है कि मेरी अम्मी ऐसे लोगों में से एक हैं।
अब मैं बड़ी हो गई हूं और समझती हूं कि वह कोई आम गुब्बारा नहीं था जिसमें हीलियम या दूसरी किस्म की गैस भरी होती है। जिसे दूसरों के चेहरों पर खुशियां और मुस्कान लाने के लिए बनाया जाता है। यह गुब्बारा तो बेरहमी, अमानवीयता, असंवेदनशीलता और क्रूरता की गैस से भरा होता है, जिसका एक ही मकसद होता है- दुख, मुसीबत और सभी की आंखों में आंसू लाना।

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