हाईवे

कुबरा |

मेरी सबसे पहली नौकरी ‘हूडा सिटी सेंटर’ के एक अरबी रेस्त्रां में थी। मैंने वहां 7 या 8 महीने काम किया।

मुझे लगाने लगा था कि मैं बड़ी हो गई हूं। “अब मैं कहीं भी अकेले जा सकती हूं, बिना अपनी मां के।”

लेकिन मैंने जैसे ही रेस्त्रां का काम छोड़ा, सब कुछ बदल गया।

मैंने एक फार्मेसी में ट्रांसलेटर की नौकरी करनी शुरू की। यह फार्मेसी मेट्रो स्टेशन से कुछ दूर थी। वहां पहुंचने के लिए मुझे 15 मिनट पैदल चलना पड़ता था, वह भी हाईवे पर। इसके बाद मेन रोड आती थी।

हाईवे पर रात में अंधेरा होता था, रास्ता दिन के मुकाबले लंबा और डरावना लगता था।

कारों की आवाजों से गूंजती, लेकिन मेरे लिए मानो सन्नाटा, क्योंकि उस अंधेरी सड़क पर मैं अकेली होती थी।

कारें तेजी से निकलती जाती थीं।

मैंने उस फार्मेसी में सिर्फ एक महीने काम किया लेकिन रेस्त्रां में काम करने के अनुभव से वह अनुभव एकदम अलग था। फार्मेसी में सिर्फ अरबी लोग आते थे और मैं वहां अकेली लड़की थी। रेस्त्रां की तरह यहां मेरी देखभाल करने वाला कोई नहीं था और न ही मेरे लिए वहां कोई खास काम था। काम काफी बोरिंग था और मैं किसी से बात नहीं कर पाती थी।

सबसे बुरा था, फार्मेसी से घर तक का सफर। मेरा बॉस मुझे रोज समय से पहले घर जाने की इजाजत दे देता था क्योंकि मैं देर तक नहीं रुक सकती थी।

हाईवे पर अकेले पैदल चलना डरावना था। शुरुआत में मुझे रास्ता भी पता नहीं था। एक बूढ़े आदमी ने मेरी मदद की। उसने मुझे वह रास्ता बताया जहां से मुझे कैब या ऑटो आसानी से मिल सकता था। उसने मुझे सुरक्षित मेट्रो स्टेशन पर उतार दिया।

लेकिन फिर भी हाईवे मुझे डराता था क्योंकि यहां लोग मुश्किल से दिखते थे और अच्छे लोग तो बिल्कुल भी नहीं दिखते थे। हाईवे पर किसी का भरोसा करना खतरनाक था। यहां तो दिन में भी किसी पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

एक दिन मैं फार्मेसी जा रही थी- मैंने एक ऑटो किया। ऑटो खाली था। मुझे जल्दी थी। मैं नहीं चाहती थी कि अपना स्टेशन मिस करूं। हम फार्मेसी के पास थे। मैं किराया देने के लिए पर्स खोल रही थी। ऑटो तेजी से भागा जा रहा था। पर्स से पैसे निकालने पर मैंने देखा कि फार्मेसी दूर छूट चुकी है। मैं चिल्लाई- “रोको-रोको। ये कौन सी जगह है? आप फार्मेसी से आगे कैसे निकल आए? मुझे यहीं उतारिए।” ड्राइवर ने ऑटो रोक दिया। मैंने उसे किराया दिया और तेजी से चलने लगी। मैं हैरान थी और डरी हुई भी। ऐसी घटनाएं दिन या रात, कभी भी हो सकती हैं। हम किसी पर भरोसा नहीं कर सकते।

रात को हाईवे को अकेले पार करना बहुत खौफनाक होता था।

जब भी मैं हाईवे पर अकेले पैदल चलती थी, मैं बहुत कुछ सोचती जाती थी। जिंदगी, आने वाले कल और सभी चीजों के बारे में नेगेटिव विचार आते थे। मैं खुद से ही बातें किया करती थी।

“मैं अपनी जिंदगी के साथ ये सब क्या कर रही हूं?इसके बाद क्या होगा? मैं अपनी सहेलियों से कितने दिन दूर रहूंगी? क्या मेरे सपने कभी सच होंगे? क्या जिंदगी में मेरे लिए कोई उम्मीद बची है?” और भी बहुत सी बातें मुझे नाउम्मीद करती थीं।

मैं ऐसे जताती थी कि जैसे मैं फोन पर बात कर रही हूं लेकिन फोन पर कोई नहीं होता था। हाईवे मेरे आस-पास पसरा होता था।

वहां सिगरेट बेचने वाली कुछ दुकानें थीं और कुछ आदमी, जो दुकानों के इर्द-गिर्द मंडराते थे।

हाईवे पर एक के बाद एक, दर्जनों कारें दौड़ती रहती थीं- बिना रुके। तेज रफ्तार।

वह हाईवे मुझे एहसास कराया कि मैं बहुत कमजोर हूं। शायद एक छोटी सी बच्ची। मैं अकेले समस्याओं से नहीं जूझ सकती। मुझे अपनी जिंदगी की परेशानियों को दूर करने के लिए अब भी मां और सहेलियों के सहारे की जरूरत है।

वह हाईवे मेरी जिंदगी का सबसे बुरा तर्जुबा था।

उसने मुझे सिखाया कि मुझे कभी अपने कंफर्ट जोन से बाहर कदम नहीं रखना चाहिए।

अकेले में मैंने महसूस किया कि मैं व्यर्थ और बेकार हूं। मैंने सपने देखना, उम्मीद करना छोड़ दिया। मैं नेगेटिव बनती गई।

हाईवे ने मेरा आत्मविश्वास मुझसे छीन लिया। उसने मुझे मेरे दोस्तों और अपने प्रिय लोगों से बहुत दूर कर दिया।


Highway

Kubra

My first job experience started with an Arabic restaurant which was located at “Huda city center”. I worked for about 7 or 8 months there.

I thought that I am a grown up. “Now I can go anywhere alone; without my mother.”

However, when I left the restaurant, everything changed.

I went to a pharmacy to work as translator. This was a little far from the metro station. To reach the place, I had to walk on the high way for about 15 minutes before reaching the main road.

Highway

In the night time, it was dark; longer than day time and scarier than usual.

Full of car sounds yet seemingly silent for me because I was alone on that long dark street.

Cars were going by so fast.

I only worked for one month in a pharmacy but that experience was totally different from the restaurant. In the pharmacy only Arabic people visited and I was the only girl there. Unlike the restaurant, there was no one to take care of me and there was not much work for me. Work was boring and I could not communicate with anyone.

The hardest part of the job was returning home from the pharmacy. My boss allowed me to leave before time every day but it was still late for me.

Walking alone to that highway was scary. In the beginning, I didn’t know the way. An old man helped me discover the way and directed me to the area from where I could take a cab or auto easily. He dropped me to the metro station safely.

But the highway was still scary because finding people was difficult and finding good people was rather impossible. Trusting any one in that highway was dangerous. One cannot even trust drivers during day time.

One morning while coming to the pharmacy, I took an auto. The auto was empty. I was in a hurry all the time. I was alert so as not to miss my station. We were close to the pharmacy. I looked down to take out money from my purse but that auto sped across. When I looked up, we were far away from the pharmacy. It was so far that I shouted and said “stop stop! Where is this place? When did you cross the Pharmacy? I want to get down”. He stopped and I gave him the money and I walked really fast. I was shocked and afraid. Such incidents can happen any time during the day or night. One cannot really trust others.

In the night time crossing that highway alone was scarier.

Whenever I went to the highway alone, I used to think aloud. I induced negative thoughts about life, future and everything. I used to talk to myself.

What I am doing with my life? What will happen after that? How long will I be far from my friends? When will my dreams come true? Is there any hope for me to live?” Lots of other things made me hopeless.

I used to pretend that I am talking on the phone, but no one was on the phone. It was just me on the highway.

Only a few small cigarette shops were there, and a few men around the shops of cigarette.

Highway full of cars which were passing by so fast. It was unstoppable.

That Highway made me realize that I am still weak; perhaps a kid. I can’t face problems alone. I still need my mother and my friends around me to deal with life problems.

That high way was the worst experience of my life.

That high way made me decide to never step out from my comfort zone ever.

Alone, I felt useless and worthless. I stopped dreaming, hoping and became negative.

That highway took away all my self-confidence. It made me distant from my friends and the people I loved.

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