अँधेरा

नर्गिस |

अंधेरे से बहुत से लोगों को डर लगता है- मुझे भी लगता है। अंधेरा आपके भीतर डर पैदा करता है। एक बार डर पैदा हो जाता है तो फिर वह कभी जाता नहीं। मैं बचपन से अंधेरे डरती हूं। डर मेरे दिलो-दिमाग में छाया रहता है। जब भी लाइट चली जाती है या कोई जगह अंधेरी होती है, मैं किसी कोने में दुबक कर बैठ जाती हूं। टॉर्च जला लेती हूं या किसी को अपने पास बैठा लेती हूं। अंधेरा किसी के लिए महज एक शब्द हो सकता है लेकिन किसी दूसरे के लिए उसका बहुत बड़ा मायने हो सकता है। जैसे किसी नजदीकी के खो जाने का एहसास। मेरा मानना है कि अंधेरा सिर्फ शब्द या एहसास नहीं है। जब मैं अंधेरे में बाहर निकलती हूं, मुझे लगता है, कोई मुझे पकड़ लेगा और मार डालेगा।

मैं अंधेरे से तब से डरती हूं, जब मैं सिर्फ 5 या 6 साल की थी। मैंने अपने बड़े भाई-बहनों से कंप्यूटर चलाना सीखा था। मैं उन्हें कंप्यूटर चलाते देखती थी। जब मैंने खुद कंप्यूटर चलाना सीखा तो धीरे-धीरे मैं इंटरनेट की दुनिया में भी दाखिल हो गई। गेम्स खेलने लगी, फिल्में देखने लगी। इसी दौरान सजेशन लिस्ट में मैंने हॉरर फिल्में भी देखीं। मैं इस हद तक अचंभित हुई कि इन फिल्मों को भी देखने लगी। हालांकि मुझे किसी खास फिल्म का नाम तो याद नहीं, न ही मुझे यह याद है कि किस दृश्य में भूत या चुड़ैल आते थे। एक दृश्य जरूर याद है जिसमें एक लड़की अंधेरे में किसी को पुकारने की कोशिश करती है। एकाएक सफेद कपड़ों और खुले बालों वाली एक औरत आती है। इसी क्षण मेरे भीतर डर समा गया और फिर मुझे उससे कभी निजात नहीं मिली।

मैं आत्मा, भूत वगैरह की कहानियों में भी विश्वास करती हूं।

एक और कहानी है जिसकी वजह से मैंने डरना शुरू किया और भूत, आत्मा वगैरह में मेरा विश्वास बढ़ा। यह मेरी बहन की सहेली की आपबीती है। उसने हमें बताया कि एक दिन शाम 4-5 बजे के बीच वह घर पर अकेली थी। घर का हर दरवाजा, खिड़की बंद थी। घर के काम करने के बाद वह एक कमरे में सोने गई। जैसे ही उसने अपनी आंखें बंद कीं, अचानक किसी ने उसका माथा छुआ। जब उसने अपनी आंखें खोलीं, वहां कोई नहीं था। चिल्लाकर उसने अपने आस-पास देखा पर वहां कोई नहीं था।

इन सभी घटनाओं के बाद मेरा डर और बढ़ गया।

यहां खिड़की में एक दिन मैं स्कूल से घर आई तो घर पर कोई नहीं था। फ्यूज में कोई दिक्कत होने की वजह से दो कमरों में पावर कट था। मैं सोच रही थी कि अब मैं स्कूल के कपड़े कैसे बदलूंगी। मैं काफी थकी हुई थी लेकिन किसी तरह मैं उस कमरे में गई, जहां मैं कपड़े बदला करती हूं। कपड़े बदलते समय मुझे ऐसा लगा, जैसे वहां कोई मौजूद है और मुझे देख रहा है। जब मैं अफगानिस्तान में थी, तब ऐसी अफवाहें उड़ती थीं कि बहुत से घर भुतहा हैं। एक बार मैंने टीवी पर देखा था कि एक लड़की ने आत्महत्या कर ली थी या किसी ने उसे मार दिया था। उन सभी को याद करके मैं डर जाती हूं और मुझे लगता है कि कोई मुझे देख रहा है या मेरी हत्या की योजना बना रहा है। वह पहली बार था, जब मैं घर पर अकेली थी। पावर कट की वजह से यह समय बहुत बुरा था। फिर भी मैंने कपड़े बदले और लिविंग रूम में वापस आ गई। फिर मुझे राहत मिली और मैंने लंच किया।


Darkness

Nargis |

Darkness, something that scares many people, affects me too. Darkness has the ability to instill fear in you. Once the fear settles down, it may never leave. I am afraid of darkness since my childhood. The fear of darkness is in my heart and my brain. Whenever the light goes out or the place is dark, I just sit in the corner and switch on the torch or ask someone to be with me. Darkness maybe just a word for some people but for a few others, it is a feeling of losing oneself. According to me, it is more than a feeling or a word. When I put forth a step in the dark, I feel as if someone will catch me and kill me.

My fear of darkness started when I was only 5 or 6 years old. I learnt how to put on the computer from my elder siblings. I used to closely watch them use the machine. When I learnt to navigate my way around the computer, slowly it helped me discover the world of internet. Then I used to play games and watch movies. As I began watching movies, horror movies also came up in the suggestion list. I wondered about those films and watched those too. I don’t remember the name of that particular movie or the scenes where the ghost appeared. In one scene, a girl was in a dark place and she was trying to call someone. Suddenly, one woman came in a white dress with long hair. That was the moment when fear of darkness caught me and I could never get rid of it.

I also believe in stories of spirits and ghosts.

There is also one story which helped my fear to develop and made me believe in ghosts and spirits. This was my sister’s friend’s story. She told us that one evening around 4 or 5 pm, she was all alone at home. She locked every door and window and went to sleep in one room after finishing all her house chores and work. To her surprise, when she closed her eyes, suddenly someone touched her forehead. When she opened her eyes, nobody was there. She called out and had a look at her surroundings. But, nobody was there.

After hearing about all these incidents, my fear further grew.

One evening here in Khirki, I came from school and no one was at home. Due to some issues with the electrical fuse, there was power cut in two rooms. I was thinking how I would go there to change my clothes. I was really tired but somehow I pushed myself to the room where I usually change clothes. While changing, I felt as if someone was there and was watching me. When I used to live in Afghanistan, there were a lot of rumors about most of the houses being haunted. Not just that, I also used to watch TV and once I watched news about a girl who had committed suicide or was killed by someone. Remembering those things, I got scared and felt as if someone was watching me or maybe planning to kill me. That was the first time when I stayed at home alone but the tiredness was less compared to the next time. The second time was quite terrible because of the power cut. Somehow, I changed my clothes and came back running to living room. After that I rested and had lunch.

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