रजनी जी से एक मुलाकात

मेरा नाम रजनी है। और मैं मेरा परिवार खिडकी विल्लेज में एक साथ रहती हूँ। आज के भाग दौड भरी जिन्दगी में मैं बाहर काम करने के साथ साथ, घर का और परिवार का ख्याल भी रखती हूँ और जीन्दगी बीता ही हूँ।

आप की शादी कब हुई थी ?

मेरी शादी 1996 में हुई थी, जब मेरी शादी हुई थी तब एक दम से बदलाव आना शुरू हो गया था।

पहले हम दिल्ली में मस्जिद मोठ में रहते थे। फिर मैं शादी कर के खिडकी विलेज आई।

एक हॉउस वाइफ होने के साथ अपनी रोजमर्रा की कई छोटीछोटी जरुरतो को पूरा करने के लिए मैंने चिंतन मनन शुरू कर दिया। शादी के बाद हसबंेड के बारे में पता चला उनको कुछ प्रॉब्लम था, शादी से पहले उनका एक्सीडेंट हो गया था उन्होंने वकालत की है। सब कहते थे कि उनके हाथ में विद्या बहुत है।

आप अपने मोहल्ले कि महिलाआंे के बारे में क्या समझ रखते है ?

यहाँ सब अपने घर चलाने के लिए बहार जॉब करने जाती है। और घर और पति को सपोर्ट करती है। मोहल्ले की काफी महिलाये घर और बाहर संभालती है और अपने परिवार को अच्छा रखने के लिए दिन रात मेहनत करती है।

मैं भी शादी के बाद बहुत दिनों तक घर में रही। मुझे पता लगा कि मेरे पति काम नहीं कर सकते उनको चोट है तो सोचा अगर घर चलाना है तो पति को कुछ न कुछ तो करना पडेगा। मैंने घर की स्थिति को देख कर जॉब शुरू करदी।

शादी के बाद घर के सभी छोटी बडी जिम्मेदारी संभालने के लिए काम करना जरुरी था। वसंत विहार में मुझे जॉब करने जाना होता था और फिर धीरे धीरे पति को काम काजी जिन्दगी में सपोर्ट करने लगी।

आप ने शादी के बाद अपना घर कैसे बनाया ?

आज से 10-12 साल पहले ढाईतीन हजार रूपये निकालना बहुत बडी बात थी, हम जब यहाँ आये तो उतना पैसा नहीं था। जो मुझे शादी के वक्त मुहं दिखाई के सोया दोसो रुपए मिले थे मैंने वही जमा किये हुए थे, उन्ही पैसो से कमरा रेंट पर लिया।

हमारे सामने और पीछे सब कहते थे कि आप के पति तो वकील है, क्या जरुरत है काम करने की। मैं जानती थी कि पति के काम न करने की वजह से लोग कॉमेंट्स करते है।

यहाँ इतना खर्चा और किराये के मकान में रहना बड़ा मुश्किल होता था। शादी के बाद हम कुछ समय तक के लिए स्टेबल थे पर उसके बाद मैंने स्तिथि को देखा और मेहनत करना शुरू किया।

तब मेरी सैलरी 2500 थी। ये 1996 की बात है, उस समय में इतने कम पैसो में घर का खर्च निकालना, रूम का रेंट निकालना, अपना कुछ बचाना बहुत मुश्किल होता था। जब हम नए घर में आये और रेंट पर रहना शुरू किया तो लगा कि अनमैरिड से मैरिड होने के बाद कितना कुछ संभालना होता है और हसबंेड को जॉब न होते हुए उनका खर्च और घर का खर्च निकलना बहुत मुश्किल होता है। मैंने तब तक अपने पेरेंट्स को कुछ भी नहीं बताया था, उनके दुःख का कारण नहीं बनना चाहती थी।

आप बाहर के लोगांे से डरती थी या उनकी सोच से ?

डर तो लगता था। एक समय तक यह सोच ही हावी रहती थी। अपने अतीत को जब याद करती हूँ तो बडी ताकत मिलती है। जब मैं कालेज में थी तो मुझे कपड़े पहनने का बडा शौक था, मेरी सहेलियां सोचती थी कि रजनी आज क्या पहन कर आएगी। उस समय एक नयापन सा रहता था। सब सोचते थे कुछ क्रियटीव पहनना है, कुछ अलग पहनना है।

मुझे आज यहाँ तक पता नहीं की मेरी शादी में मेरे माँ ने कौन से कपडे दिए, क्या ज्वेलरी दी। अब जैसे पहनने का शोक ही नहीं रहा। शादी के बाद से ही इतना काम किया तो खुद का वो चेहरा ही भूल गयी, चलते चलते बहुत कुछ छुट गया अब उम्र भी ज्यादा हो गई है। जो मिलता है उसीसे काम चला लेते है। पहले मेरे अपने अधिकार, अपना समय होता था कि कब कहाँ जाऊँ।

इतने दिन हो गए मुझे घर में ट्यूशन पढाते हुए। मेरे हसबेंड तो डिस्टर्ब होते हे, उनको प्रॉब्लम होती है कि जेंट्स क्यों पढ़ने आते है। ये वोमेन के लिए लिमिटेशन आदमी ने ही बना रखी है कि यह मत करो वो मत करो। जब काम करने जाते है तो माहोल के मुताबिक तो रहना पडता है।

आज के टाइम में यहाँ पर महिलाओ को बिजनेस करने के लिए थोडा ओपन तो होना चाहिए।

क्या आपके मोहल्ले में महिलाओ क® बाहर निकलना होता है ?

आज मुझे यहाँ बीस साल हो गए यहीं गलियों में आना जाना है। मुझे यहाँ सब जानते पहचानते है बच्चे, बढ़े, बूढे। इसके बावजूद भी मुझे आते जाते आदमी देखते है। पता नहीं क्यों उनके देखने का तरीका कुछ अजीब सा होता हैै।

जब बाहर निकलने का टाइम था तब मैं घर में अन्दर ही रही। जिन को मैंने घर में ट्यूशन पढाया है, वो मेरे स्टूडेंट्स, बडे हो गए है। उनका सोचना कैसा है मुझे पता नहीं पर वो भी आदमियों की तरह लडकियो को गली से निकलते देख कर छेड़ते है और घूरते हैै। शायद उसने क्या नया पहना हैै देखने का मजा लेते है।

आप देखिये कि अगर हम एक दिन सर्वे कर के देखे, ¨ पता चलेगा कि ज्यादातर महिलाये काम पर जाती हैै। कुछ घर में रह कर ही काम करती हैै। उन्हे घर के काम के बाद जब कुछ समय मिलता है तो वे अपने बारे में सोचने और ख्याल करने के लिए बाल्कनी में खड़ी होती है या जीने में बैठ जाती है या कुछ बाहर निकलती है और आदमी उन्हें घूरते है। अब कहाँ जाये वे महिलाये ?

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