‘मर्दों की गली में’ जवान मां

नर्गिस | खिड़की एक्सटेंशन के जिस इलाके में मैं रहती हूं उसे मेन रोड से जोड़ने वाली एक गली में हर वक़्त इतने आदमी आते-जाते हैं कि मैंने उसका नाम ही ‘मर्दों वाली गली’ रख दिया है। जब से काबुल छोड़ कर मेरा परिवार यहां दिल्ली आकर बसा है, तब से अपनी बस्ती से बाहर... Continue Reading →

Is working outside the home a big challenge for women?

Hadiya | Whenever I went to Bhagat Singh Park in our neighbourhood of Khirki/Hauz Rani, I would see a young, pretty woman ironing clothes in a stall in front of the park. Another woman of her age was always with her (clarify). The presswali looked friendly, so I decided to go and talk with her... Continue Reading →

चैधरी चाय

नितिन चैहान | वैसे तो चाय हम बहुत पीते हैं। मैं भी घर की चाय ख़ूब पीता हूं, लेकिन एक बार मेरे दोस्तों ने बाहर की चाय पिलाई। दोस्तो का कहना था कि उस दुकान पर चाय पीने के लिए हौजरानी, सावित्री नगर, चिराग़ दिल्ली, यहाँ तक कि मदनगीर जैसी दूरदराज की जगहों से भी... Continue Reading →

Do dress codes matter?

Farha | I was a very small child when my mother explained to me our national custom of women and girls wearing long skirts, long sleeves and covering their heads with a scarf. The social belief in Somalia was that women and girls who wear short or revealing garments attract the eyes of men, and... Continue Reading →

एक अजनबी की मौत

साबरा | वह जब अफ़गानिस्तान से भारत आया था तो मेरी उम्र नौ साल थी। मुझे अब वाक़ई याद नहीं पड़ता कि वहां मेरी शुरूआती जि़ंदगी किस तरह की थी। हमारे शहर काबुल में अपहरणकर्ताओं के आंतक के कारण अब्बा और चाचा मुझे घर से बाहर नहीं जाने देते थे। मैं बाहर बच्चों के साथ... Continue Reading →

Street Foods

Gufran | Chhole-Bhature In our locality there is an Uncle who makes chhole-bhature. He has been doing this work for a long time, maybe 20-22 years. He has a shop in Hauz Rani that he has been running for the past 10-12 years, and for all this time he has been selling chhole-bhature and other... Continue Reading →

आजादी कहां से आती है?

नरगिस | इस धरती पर जिंदा रहने के लिए हर आदमी को कोई न कोई काम करना पड़ता है। आदमी की यह सबसे अहम ज़रूरत होती है। कुछ लोग अपना काम उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद शुरू करते हैं, कुछ हाई स्कूल के बाद शुरू कर देते हैं और बहुत से औपचारिक शिक्षा के... Continue Reading →

He has no choice

Hadiya | Raju-ji is a very familiar presence to us. We have met him so many times in Khirki. He sits at a corner of one of the lanes and repairs all kinds of footwear. We chose this site for one of our wall-painting projects. He did not object, in fact he appreciated what we... Continue Reading →

बंकर 

ज़ाहरा | एक दिन हम गहरी नींद में सो रहे थे कि अचानक जोरदार धमाका हुआ। हम जाग गए। हमें पता चला कि दूसरे मैक्रोरायन क्षेत्र में तनाव भड़क गया है। यह क्षेत्र काबुल सागर और पहले मैक्रोरायन क्षेत्र की दूसरी तरफ था। हम पहले मैक्रोरायन क्षेत्र में रहते थे। धमाका इतना तेज था कि... Continue Reading →

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